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भव्य ‘तीज उत्सव-25’ में पंजाबी लोक विरासत का शानदार प्रदर्शन

 

– पंजाबी गायकों गलोरी बावा व जितेंद्र जीतू के गीतों पर नाच उठा पंडाल

-तीज जैसे त्योहार हमारी परंपराओं को जीवित रखते हैं और समाज को एक साथ जोड़ते हैं: रविंद्र शर्मा

डबवाली-पजाबी लोक संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से, उत्तरी क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र, पटियाला, वरच्युस क्लब और बाल मंदिर स्कूल के संयुक्त तत्वावधान में बाल मंदिर स्कूल के प्रांगण में एक शानदार ‘तीज उत्सव-25’ का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवा पीढ़ी को अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना था। इस उत्सव में स्कूल की छात्राओं के साथ-साथ उनकी माताओं और डबवाली क्षेत्र की अन्य महिलाओं ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया।

 

कार्यक्रम की शुरुआत विशेष अतिथि आरती सोनी, किरण सिंगला, वंदना चुघ के साथ वरच्युस क्लब के संस्थापक केशव शर्मा बाल मंदिर स्कूल प्रबंधन समिति प्रधान नीरज जिंदल एवं ने मां सरस्वती की प्रतिमा के सामने ज्योति प्रज्जवलित करते हुए की। विद्यालय प्रबंधन समिति की ओर से नीरज जिंदल ने सभी अतिथियों, कलाकारों और मेहमानों का स्वागत किया। अपने स्वागत भाषण में, उन्होंने तीज को परंपराओं, संस्कारों और लोक संस्कृति को सहेजने का एक सुंदर माध्यम बताया।

इस अवसर पर बाल मंदिर स्कूल की छात्राओं ने पारंपरिक गिद्दा और पंजाबी लोकनृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। छठी से आठवीं कक्षा की छात्राओं ने भी पंजाबी डांस प्रस्तुत किए, जबकि दसवीं से बारहवीं कक्षा की छात्राओं ने लोकगीतों से समां बांध दिया।

इस उत्सव में विभिन्न प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया गया। रंगोली प्रतियोगिता में प्रथम स्थान-अशोक सदन, द्वितीय स्थान-शिवाजी सदन, तृतीय स्थान प्रताप सदन, सांत्वना पुरस्कार-टैगोर सदन ने प्राप्त किया। मेहंदी प्रतियोगिता जूनियर वर्ग में प्रथम स्थान-समीत, द्वितीय स्थान-आराध्या, तृतीय स्थान-हसरत ने पाया। मेहंदी प्रतियोगिता के सीनियर वर्ग में प्रथम स्थान-अदिति, द्वितीय स्थान-अमृता, तृतीय स्थान- खुशी ने प्राप्त किया। इसके अलावा, पहेलियां, किकली मुकाबला और पंजाबी विरासत पर आधारित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता जैसी अन्य प्रस्तुतियां भी देखने को मिलीं। महिलाओं के लिए पारंपरिक झूलों की व्यवस्था की गई और एक विशेष प्रदर्शनी में पंजाबी विरासत की झलक पेश की गई।

कार्यक्रम में पद्मश्री स्वर्गीय गुरमीत बाबा की बेटी गलोरी बावा और लोक गायक जितेंद्र जीतू ने अपनी मधुर आवाज में पंजाबी लोकगीत और बोलियां प्रस्तुत कर दर्शकों को नाचने व झूमने पर मजबूर कर दिया। जितेंद्र जीतू ने पंजाबी टप्पे, बोलियां और पंजाबी लोक संस्कृति की निशानी छल्ला गाकर कार्यक्रम को खूब रंग जमाया। वहीं, गलोरी बावा ने आजा भाभी झूट लै.., हुले हुलारे हुल्ले-हुल्ले, अमृतसरे दे पापड़.., बल्ले नी पंजाब दीए शेर बच्चिए.., लठ्ठे दी चादर उत्ते…, काला डोरिया आदि परंपरागत गीत गाकर व बोलिया सुनाकर कार्यक्रम को एक अलग ही मुकाम पर खड़ा कर दिया। इस दौरान सुप्रसिद्ध रंगकर्मी संजीव शाद ने प्रभावशाली मंच संचालन किया।

इस अवसर पर, पंजाब के प्रसिद्ध नाटककार स्व. अजमेर सिंह औलख की धर्मपत्नी और फिल्म कलाकार श्रीमती मनजीत औलख को कला के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए ‘वरच्युस अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया। संबोधन में मनजीत औलख ने तीज के सामाजिक और पारंपरिक महत्व पर प्रकाश डाला और अपने नाटकों के कुछ डायलॉग्स भी सुनाए। डा. बीर चंद गुप्ता ने मनजीत कौर औलख के सम्मान में सम्मान पत्र पढ़ा। क्लब प्रवक्ता सोनू बजाज ने बताया कि वरच्युस क्लब की ओर से पुष्पा जिंदल, डॉ. प्रेमकांता, डॉ. मानविंद्र कौर गुलाटी, शशि प्रभा अग्रवाल और विजय लक्ष्मी कौशिक को भी ‘विरासत-ए-सम्मान अवार्ड’ से नवाजा गया।

उत्तरी क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र, पटियाला के असिस्टेंट डायरेक्टर रविंद्र शर्मा ने कहा कि तीज जैसे त्योहार हमारी परंपराओं को जीवित रखते हैं और समाज को एक साथ जोड़ते हैं। उन्होंने कहा कि त्रिवेणी शहर डबवाली में उत्तर क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र पटियाला की ओर से आगामी समय में बड़े सांस्कृतिक करवाए जाएंगे। क्लब संस्थापक केशव शर्मा ने सभी को तीज पर्व की बधाई देते हुए कहा कि वरच्युस क्लब कला व संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए समय-समय पर ऐसे आयोजन करता है। इससे कलाकारों को मंच मिलता है व आम जन को भी अपनी पारंपरिक विरासत से जुड़ने का मौका मिलता है। उन्होंने कहा कि आगामी समय में भी उत्तर क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र पटियाला के साथ मिलकर डबवाली इलाके में बड़े आयोजन कर कलाकारों को प्रतिभा दिखाने का मौका प्रदान किया जाएगा।

कार्यक्रम का समापन बाल मंदिर स्कूल के प्रधानाचार्य सुरेंद्र कुमार कौशिक के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने कहा कि तीज सिर्फ एक त्यौहार नहीं, बल्कि हमारी लोक संस्कृति, परंपरा और आपसी मेलजोल का प्रतीक है, जो नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ता है।

इस अवसर पर बाल वाटिका प्रबंधन समिति के अरुण जिंदल, प्रेम सेठी, कंचन हरचंद, सुरेंद्र बंसल, कुलदीप गोरीवाला, क्लब की प्रबंधन समिति के सदस्य परमजीत कोचर, वेद कालड़ा, संतोष शर्मा, जितेंद्र शर्मा, हरदेव गोरखी,तरसेम गर्ग ज्ञानी ज्ञान सिंह बिट्टू मानसा, जगराज धोला, गुरमान सिंह सिद्धू, जितेंद्र जीतू, लवली नागपाल, मनोज शर्मा, सुखविंदर चंदी, प्रणव ग्रोवर, अमित महेता भारत भूषण वधवा, डॉ निर्मल नागपाल, रेखा गुप्ता, सर्वजीत कौर, मनजीत कौर, गुरप्रीत कौर, मधु कोचर, स्वर्ण लता व रिपुदमन शर्मा उपस्थित थे।